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बजट में लोकहितों के साथ न्याय नहीं हुआ : विपक्ष
नई दिल्ली (महामीडिया): लोकसभा में विपक्ष ने कहा है कि सरकार ने बजट 2026 -27 में लोकहितों की अनदेखी कर विभिन्न क्षेत्रों के लिए व्यवस्थागत अन्याय किया है और कल्याण, रोजगार सृजन तथा कौशल विकास जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवंटित पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ेगा।
शशि थरूर ने बजट 2026-27 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार बड़ी बड़ी बात करती है लेकिन बजट में वित्तीय विवेक की बातें असहज करने वाली है और सरकार के खर्च में पिछले दशक में गिरावट आई है और सिर्फ महामारी के समय में इसमें वृद्धि हुई है। आम लोगों पर कर का बोझ लगाया गया है, राजस्व आम आदमी से आ रहा है और वित्तीय अनुशासन नदारद हैं। उत्पादकता तथा रोजगार बढ़ाने के लिए कोई उपाय नहीं हैं और कल्याणकारी योजनाओं का खर्च कम किया गया है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश तब तक विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता जब तक उसके पास विनिर्माण नहीं होगा। सरकार उस पर ध्यान दे रही है क्योंकि इससे निर्यात बढ़ेगा, देश का ढांचागत विकास तेज होगा और बेरोजगारी घटेगी। अच्छी बात यह है कि सेमीकंडक्टर जैसी आधुनिक जरूरत पर बजट में 40 हजार करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है और इससे यह उम्मीद की जानी चाहिए कि यह 2047 के विकसित भारत की तरफ का एक बहुत बड़ा कदम है। यूरोपीय संघ, अमेरिका तथा अन्य देशों के साथ जो व्यापार समझौते हुए उससे साफ होता है कि भारत में विखंडित वैश्विक माहौल में भी आगे बढने की क्षमता है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों पर बजट में ध्यान नहीं दिया गया है। उनका कहना था कि हमारी आबादी का 60 प्रतिशत कृषि पर निर्भर है और इसके लिए बहुत कम बजट आवंटित किया गया है जो चेतावनीपूर्ण है और इसका बहुत दुष्प्रभाव पड़ेगा। कृषि क्षेत्र के साथ व्यवस्थागत अन्याय हुआ है और पिछले आठ साल में सबसे कम आवंटन कृषि क्षेत्र के लिए किया गया है। पीएम किसान निधि पर सरकार मौन है और पिछले छह साल से किसान निधि सिर्फ छह हजार पर ही अटकी है। अंग्रेजों ने जिस तरह की लूट की थी वैसी स्थिति पैदा हो गई है जिससे संकट गहराता जा रहा है। आकांक्षा और हताशा टकरा रही है। रोजगार की स्थिति कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रह गयी है। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप के लिए बड़ी रकम खर्च ही नहीं हुई है। रोजगार सृजन के लिए तथा अन्य मदों के लिए आवंटित पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है।





