सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की रचनात्मक आलोचना को सही बताया

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका की रचनात्मक आलोचना को सही बताया

भोपाल [ महा मीडिया] सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक संस्था के तौर पर न्यायपालिका की आलोचना हो सकती है और न्यायिक कामकाज की निष्पक्ष, जानकारीपूर्ण और रचनात्मक आलोचना एक जीवंत संवैधानिक लोकतंत्र की जायज़ और ज़रूरी विशेषता है। हालांकि, चीफ जस्टिस  सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि ऐसी आलोचना सही मंच और निष्पक्ष, तर्कसंगत तरीके से की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि बिना पुष्टि वाली आलोचना बच्चों के लिए बने स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं की जानी चाहिए।
 

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