नवीनतम
52,000 करोड़ रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी को लेकर बैंकों को अलर्ट किया गया
भोपाल [महामीडिया] सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि बैंकों को एक एआई-आधारित तंत्र तैयार करना चाहिए जो किसी खाते से सभी संदिग्ध लेन-देन को पहचान सके अलर्ट जारी करे और जब तक लेन-देन खातेधारक द्वारा प्रमाणीकृत न हो जाए तब तक स्थानांतरण को स्थगित कर दे। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति बागची और न्यायमूर्ति अंजरिया की पीठ ने कहा कि गृह मंत्रालय ने अप्रैल 2021 से नवंबर 2025 के बीच ऑनलाइन धोखाधड़ी के माध्यम से लगभग 52,000 करोड़ रुपये की चिंता जनक निकासी को फ़्लैग किया है जिसमें "डिजिटल गिरफ्तारी" भी शामिल है। पीठ ने कहा कि सहज लेन-देन के लिए बैंकों द्वारा तैयार आईटी एप्लिकेशन केवल लाभ-केंद्रित नहीं होने चाहिए और असामान्य लेन-देन का पता लगाने और सच्चाई की पुष्टि करने में सक्षम होने चाहिए।